देविओं के धरती पर आज भी नारी अबला क्यों ?

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः ।

यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः ।। मनुस्मृति ३/५६ ।।

ऊपर दिए गए श्लोक का अर्थ है , जहाँ नारी की पूजा होती है , सतकार होता है , वहां देवताओं का वाश  होता है और जहाँ स्री का निरादर होता है वहां कोई भी कार्य सफल नहीं होता।

Image by Tanuj Handa from Pixabay

       ऊपर दिए गए श्लोक का अर्थ है , जहाँ नारी की पूजा होती है , सतकार होता है , वहां देवताओं का वाश  होता है और जहाँ स्री का निरादर होता है वहां कोई भी कार्य सफल नहीं होता। क्या फ़ायदा ऐसी संस्कृति का , क्या फ़ायदा ऐसे समाज का जहाँ एक स्री हर वक़्त खौफ के साये में रहती है की ना जाने कब उसके आबरू पर आ बने ।  भारत समेत पूरी दुनिया फिलहाल कोरोना वायरस नमक एक महाआपदा  से जूझ रही है। पुरे देश  भर में २१ दिनों का लॉकडाउन लगा हुआ है, अर्थात जब तक आपको अति-आवश्यक कार्य न हो अपने घरों में रहें,इस महामारी को और न फैलने देने में अपना योगदान दें । हिन्दुओं का नव-वर्ष का भी श्री गणेश  हो चूका है और साथ में शुरू हुई चैत्र नवरात्र । लोग माँ अम्बे से बिनती करने लगे हुए होंगे की माँ उन्हें इस संकट से जल्द से  जल्द बहार निकाले। 

इतना करने के बाद भी लोग बहार निकल रहे हैं, कोरोना के केहर की चरों ओर बेहिसाब बोलबाला है , इतने में सुनने में आया है की महज सोलह वर्ष की एक बालिका के साथ दुष्कर्म किया गया। ये खबर झारखण्ड प्रान्त के दुमका डिस्ट्रिक्ट की है। इंडिया टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक , लॉकडाउन हो जाने के बाद  वो बच्ची दुमका से अपने घर जाना चाहती थी और उसने अपने एक मित्र पर विश्वाश किया की वो उसे इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उसके घर सही-सलामत छोर देगा।  भूल होगई उस बच्ची से , उस दरिंदे ने अपने दोस्तों के साथ इस दुष्कर्म को अंजाम दिया जो कुल मिला कर दस लोग  थे। 

Leave a comment

Design a site like this with WordPress.com
Get started