यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः । यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः ।। मनुस्मृति ३/५६ ।। ऊपर दिए गए श्लोक का अर्थ है , जहाँ नारी की पूजा होती है , सतकार होता है , वहां देवताओं का वाश होता है और जहाँ स्री का निरादर होता है वहां कोई भी कार्य सफल नहीं होता।Continue reading “देविओं के धरती पर आज भी नारी अबला क्यों ?”
